Saturday, April 16, 2011

दिल मे प्यार लिये

मै दिल मे प्यार लिए,घर से निकलता  हू॥
कोई तो मिल ही जाएगा,यही तो सोचता हू मै ।
राहो मे खडा होके ,मेरी राहे तकेगा वो।
पथराई आखो से देख मुझे, झूम उथेगा वो
ऐसी ही प्यारी यादो के साहारे ,जी रहा हू मै॥

मै ये नही कहता ,कि मुझसे प्यार करले तू।
मै तेरी यादो मे डूबा हू ये क्या कम है ॥
इश्क़ मे जरूरत की, गुंजाइश नही होती।
इसलिये भी कितने दूर होकर तुम मेरे दिल मे बसते हो ॥

मै तुम्हे देख नही सकता, ये गम नही मुझको ।
तुम मेरी प्रेरणा बनकर ,मेरे संग रहोगे हरदम ।
मेरे सासो को तो अब भी ,तेरे धड्कन की जरूरत है ॥

तेरे भोलेपन से भरे खिल्खिलाहट का
 मै अब तक दिवाना हू ॥
मै खुदा से इतना कहूगा बस इस जनम मे न सही ,अगले मे मिला देना हमे ॥

मै अपने दिल को बस, समझाता रहता हू।
प्यार मे सब कुछ नही मिलता ,कुछ खोना तो पडता है ।
हीर- रंझा ,लैला- मजनू का इश्क़ हमसे तो सयाना था ॥
उन्हे तो मिलकर बिछुडना था ,हम तो बिना मिले ही बिछुड गये॥












पर तुमको भूला ना पाऊँगा

लम्हो कि घडियाँ  भी क्या, खूब निराली होती है।
जाडो  मे जैसे गरमागरम ,चाय की प्याली होती है॥
उन यादो मे तुम आओगे ,गीतो का सार सजाओगे ।
सन्देशा भेज कर हमको ,दिल के करीब बुलाओगे।
खुद का दिल दु:खा लो कितना ,पर मुझको भूला ना पाओगे ॥

जब तुम आये थे मेरे जीवन मे,गीते भी साजे छेडा करती थी ।
गजले अपने  रंग नमे थी ,त्योहार निराले लगते थे ॥
शतरंज के चौरस के राज हम कहलाते थे ।
मेरे चार दिनो के जीवन घडियो का ,तीन दिन तुम्हारा था ।
जब से तुम क्या चले गये ,शेष बचे दिन कटते ही नही ।
अब गजले भी मै भूल गया ,चौरस मे माते खाता हू ॥
मै सब कुछ भूला दिया हू पर तुमको भूला ना पाउंगा ॥

जब से तुम यू चले गये ,गजले भी मुझसे रूथ  गयी।
तेरे इन यादो के सहारे ,कविता अब मै लिखा करता हू ॥
तेरे जाने के बाद ,ये ही कविता जीने का सहारा सिखलाती है॥
मेरी गजले भी तुम हो ,मेरी कविता भी तुम हो ।
मैने सब कुछ भूला दिया,पर तुमको भूला ना पाऊगा ॥

तुमने मुझसे सब कुछ लिया, मेरा दिल भी  तुमने चुरा लिया ॥
हर रोज पूछता हू ईश्वर से ,मेरा प्यार बस इतना था ।
मेरे जीवन की एक गुजारिश, जो मै तुमसे जो मै तुमसे कहता हू॥
अपनी यादे दिल से मेरे निकालने को ना कहना ,जिसके सहारे अब मै जीता हू॥
मैने सब कुछ भूला दिया,पर तुमको भूला ना पाऊगा ॥