Monday, October 24, 2011

feel of life.....



1-तबले की थाप तब आती है,
  जब बान्सुरी अपनी छाप छोडे जाती है
  हर एक धुन मे, किसी की शहनाई याद आती है
  फ़िर भी दिल की आरजू है इतनी ,जो कभी पूरी नही हो पाती

2-तबले की हर एक थाप पे तो ,पूरी दुनिया झूम जाती है
  जरा उस तबले से एक बार तो पूछ लो, कि क्या वो कभी मुस्कुराती है
  हर दर्द के एक आहट से वो तड्प जाती है
  फ़िर भी महफ़िल मे बैथे चेहरो पे वो तबला ही हसी लाती है

3-दिया पूछ्ता नही रोशनी से ,कि तुम्हे अब कितना जलना है
  अपनी हर सास तक वो रोशनी को सहारा देता है
  रोशनी कि बरक्कत की खातिर खुद को कालिख कर लेता है
  रोशनी चली जाती है फ़िर भी ,दिया उसकी यादो का आखो मे सूरमा सजाय रखता है

Sunday, October 23, 2011

LOVE IS BLIND

Love is blind,how say blind?
how say bind, how say blind
close your eyes,see in the sky
feel you light ,in the sky
then don't be the fear,don't be the shy
to say everyone ,love is blind

near your heart,somebodies life
near your life,somebodies heart
then care your heart,as care your life
from beginning of your love ,starting your life
then love is blind,say love is blind
.
the childhood love ,love is truth
the youth-age love,love is faith
then choose your love,whats your love
faith or truth both is god
in which want you,see love is god
then love is blind ,say love is blind

everyone knows sacrifice is love
to whom you love you wants to give,
the happiest of the world
then close your eyes and says your heart
the love is blind,say love is blind

.......IMMORTAL..........

one day i read a book which title was immortal and it's written by Dr.P.D Sharma,which looks like to much impressive or say in other words it was "heart-touching" what an thought friends .in that's book i am going to share some lines like as...
There are 35 lines which should be adoptable for us....
1.Ability is poor man's wealth(ABILITY)
2.As we advance in life ,we learn the limits of our ability (ABILITY).
3.Never give advice unless asked advice (ADVICE)
4.Never give advice in crowd (ADVICE)
5.never give advice to anyone go for war or marry(ADVICE)
6.Youth is blunder,manhood is struggle,old age a regret (AGE)
7.A man is as old as he's feeling ,A women is as old as she's looks(AGE)
8.An angry man opens his mouth and shuts up his eyes(ANGRY)
9.Many can argue,but not many converse(ARGUE)
10.True beauty consists in purity of heart(BEAUTY)
11.Remember that most beautiful things in a world are most useless
for examp:peacocks and lilies(BEAUTIFUL)
12.A room without books like as body without soul(BOOKS)
13.The end of all knowledge must be building a character (CHARACTER)
14.wealth is lost nothing is lost,health is lost something is lost,character is lost everything is   lost(CHARACTER)
15.Call no man happy till he is dead(DEATH)
16.An impotence of a person realize after his death(DEATH)
17.Education is chief defense of a nation(EDUCATION)
18.DO error ,GO ahead(ERROR)
19.Experience is become after every failure towards success(FAILURE)
20.Success goes to your ,failure to your heart(FAILURE)
21.The family that prays together stays together (FAMILY)
22. Flowers are the sweetest things that God even made and forget to put a soul into it (FLOWER)
23.A true friend is one soul in two bodies(FRIEND)
24.A future is purchased by the present(FUTURE)
25.There is no great genius without a mixture of madness(GENIUS)
26.God helps the people,God doesn't help those people, god believes on him(GOD).
27.Man is artificer of his own happiness(HAPPINESS)
28.It is easy to hate but difficult to love(HATE)
29.You must not lose faith of humanity(HUMANITY)
30.Laughter is the best medicine in sorrow(LAUGHTER)
31.A simple life its own reward(LIFE)
32.Love is an silence of heart(LOVE)
33.It is difficult to find our first love (LOVE)
34.Everything is fair in love and war(LOVE)
35.Marriage is a van of live and husband and wife both are its Tyre(MARRIAGE) 


Note: please read with Patience ,if we'll adopt some of such then definitely life will be full of smoothness and happiness.

Thursday, October 6, 2011

art of life

First of all i would like to say thanks to GOOGLE ,that they provided BLOGGER to a medium of share feeling of heart of people  around us,now once again THANKS .......

Now according to me when the god created that world with a beautiful things of his own heart like a plant,trees,animals,fishes,birds,sky,water,peoples etc. But it is definitely that GOD wouldn't think that one day his own world will be become like as of today.
Basically my focus on that people's selfish strategy,capitalization,population,pollution(mostly water,air)
people's rude behavior, with his social life .Like that It is easy to become  too much critical and dangerous stage  for us .
 In this series many other factor like society,one most we self,our mentality such as,to that of now in a daze life is becoming a burden,too much pressurize,lack of thought and the harmful of that is suicide,heart-attack,physically & mental deasese.

Then what are the solution of that the solution is we self  to solving that problem first of all we should try to become such a people like in daze of 1970-1980 but with the including such of today's technology .because of those daze people lives freely,spend their time with social and family ,debate old-person with social and behavior ,complete his work within a define time,live with the humanity, respect of old,child,family,god.
 "so dear follow that and enjoy the happiness of life not bear burden of life"

QUOTES :   Always be happy and enjoy each & every moment of life with some changes in your routine , enjoying with chanting  "SAI-SAI-SAI"
                        :::Dedicated to Sai-Baba whom inspired me always ::: 

Saturday, April 16, 2011

दिल मे प्यार लिये

मै दिल मे प्यार लिए,घर से निकलता  हू॥
कोई तो मिल ही जाएगा,यही तो सोचता हू मै ।
राहो मे खडा होके ,मेरी राहे तकेगा वो।
पथराई आखो से देख मुझे, झूम उथेगा वो
ऐसी ही प्यारी यादो के साहारे ,जी रहा हू मै॥

मै ये नही कहता ,कि मुझसे प्यार करले तू।
मै तेरी यादो मे डूबा हू ये क्या कम है ॥
इश्क़ मे जरूरत की, गुंजाइश नही होती।
इसलिये भी कितने दूर होकर तुम मेरे दिल मे बसते हो ॥

मै तुम्हे देख नही सकता, ये गम नही मुझको ।
तुम मेरी प्रेरणा बनकर ,मेरे संग रहोगे हरदम ।
मेरे सासो को तो अब भी ,तेरे धड्कन की जरूरत है ॥

तेरे भोलेपन से भरे खिल्खिलाहट का
 मै अब तक दिवाना हू ॥
मै खुदा से इतना कहूगा बस इस जनम मे न सही ,अगले मे मिला देना हमे ॥

मै अपने दिल को बस, समझाता रहता हू।
प्यार मे सब कुछ नही मिलता ,कुछ खोना तो पडता है ।
हीर- रंझा ,लैला- मजनू का इश्क़ हमसे तो सयाना था ॥
उन्हे तो मिलकर बिछुडना था ,हम तो बिना मिले ही बिछुड गये॥












पर तुमको भूला ना पाऊँगा

लम्हो कि घडियाँ  भी क्या, खूब निराली होती है।
जाडो  मे जैसे गरमागरम ,चाय की प्याली होती है॥
उन यादो मे तुम आओगे ,गीतो का सार सजाओगे ।
सन्देशा भेज कर हमको ,दिल के करीब बुलाओगे।
खुद का दिल दु:खा लो कितना ,पर मुझको भूला ना पाओगे ॥

जब तुम आये थे मेरे जीवन मे,गीते भी साजे छेडा करती थी ।
गजले अपने  रंग नमे थी ,त्योहार निराले लगते थे ॥
शतरंज के चौरस के राज हम कहलाते थे ।
मेरे चार दिनो के जीवन घडियो का ,तीन दिन तुम्हारा था ।
जब से तुम क्या चले गये ,शेष बचे दिन कटते ही नही ।
अब गजले भी मै भूल गया ,चौरस मे माते खाता हू ॥
मै सब कुछ भूला दिया हू पर तुमको भूला ना पाउंगा ॥

जब से तुम यू चले गये ,गजले भी मुझसे रूथ  गयी।
तेरे इन यादो के सहारे ,कविता अब मै लिखा करता हू ॥
तेरे जाने के बाद ,ये ही कविता जीने का सहारा सिखलाती है॥
मेरी गजले भी तुम हो ,मेरी कविता भी तुम हो ।
मैने सब कुछ भूला दिया,पर तुमको भूला ना पाऊगा ॥

तुमने मुझसे सब कुछ लिया, मेरा दिल भी  तुमने चुरा लिया ॥
हर रोज पूछता हू ईश्वर से ,मेरा प्यार बस इतना था ।
मेरे जीवन की एक गुजारिश, जो मै तुमसे जो मै तुमसे कहता हू॥
अपनी यादे दिल से मेरे निकालने को ना कहना ,जिसके सहारे अब मै जीता हू॥
मैने सब कुछ भूला दिया,पर तुमको भूला ना पाऊगा ॥











Wednesday, March 30, 2011

प्यार कहते है किसे

प्यार कहते है किसे ,मै कभी ना जान पाया 
भागा-भागा  जब  घर को आया, आंगन  मे तुमको  ही खडा पाया \\
पहली बार जो देखा था  तुमको , कुछ भी ना सोचा था मैने 
अपने हाथो की मेहदी  दिखाकर ,तुमने कुछ पूछा था मुझसे\\
  हो सकता है ये धुन्धली  यादे , तुमने दिल से   मिटा  दी हो 
पर मेरे दिल के मध्य मे ,इसका आज तक पहरा  है\\

जब मै विकट समस्या मे था ,तुमने उसको झट से सुलझाया 
प्यार कहते है किसे ,तब मुझे  समझ मे आया \\
सूरज की किरणो के बीच हम अंताछरिया और 
चन्दा की रोशनी मे पहेलिया खेला करते थे \\
पडोसी की शादी मे तुम ,मुझको भोजन परोसा करती थी 
पानी से भरे जग को मेरे सामने रख देती थी \
मै इतना गर्व से कह सकता हू ,तुम मेरा  ख्याल बहुत  रखती थी\\


एक दिन अचानक दोपहर को तुम अपने  घर को चली गयी 
तेरे इन यादो के सहारे , मै जीवन को जीता रहता था \\
दिल मे मेरे प्यार भरा था ,पर मै कहने से डरता था
शायद तुम्हारा दिल ना टूटे ,इसलिये कभी ना कहता था\\ 
कैरियर की आपाधापी मे ,मैने तुमको भूला दिया 
पर तेरे यादो के सहारे ,मैने जीवन का बाग सजाया था\\


सोच-समझ के विचार करके ,जब सोचा था तुमसे कह दूंगा 
तेरे सामने आने को ज्योहि हिम्मत जुटा रहा तथा मै\\
मुझसे पहले आकर ,किसी ने तेरा हाथ मांग लिया
मै भी आखीर क्या कहता,ये तो बस कहानी है \\
इसमे कुछ भी तो सार नही है बाबा
कुछ नये-पुराने किस्सो का मिलकर है ताना-बाना\\

Sunday, March 13, 2011

इसमे क्या मेरी खता है

एक वक्त था जब तेरी चाह मे हम जिये जा रहे 
ये भरी  महफिल को पता था कि तुमसे प्यार है 
पर वो वक्त का दौर थ जकि तुम्हे बता ना सके \\
दिल की बातो को दिल मे छुपा कर रख लिया 
इजहार-ए-इश्क़ ना कर सके इसमे क्या मेरी खता है\\


फिर भी तेरी यादो मे हम किस्मत लिखा करते है 
तेरा एहसास ही एक सहारा थी ,जिसने हमे सम्भाला था 
घनघोर बदरिया ऐसी थी ,बिजली भी चमका करती  थी \\
पर सामने तेरे आने से मेरी जुबा रूक जाती थी 
जरा अपने दिल से पूछके बताना  इसमे क्या मेरी खता है \\


यादो के उन तारो स्रए हम सन्देशा  भेजवाया करते थे 
हम तो अपने दिल की आहट भी तुम तक पहुचाया  करते थे\\
शायद तुम तक ही मेरे दिल की आवाजे ना पहुची हो 
आखिर दिल मेरा तो  टूट गया ,इसमे क्या मेरी खता है\\







 

उसको नारी कहते है

नारी के होते है  , सब रूप अनेक
कभी वो ममता बनकर ,कभी  दुर्गा के रूप मे लेती अवतार \\
नारी  वृच्छ  की छाव सी होती ,तपती धूप भी हिला न पाये 
घनघोर पवन  छू भी ना पाये,बारिस फीकी पड  जाय \\
बाहर से  पत्थर की काया ,भीतर से मोम सी कोमल 
ऐसी प्यारी छवि को हम सब नारी कहते है \\

हर एक रूप मे वो खरी उतरती है 
फिर चाहे वो पत्नी हो  माँ  हो  चाहे घर की  लक्ष्मी हो \,
माँ   के उस आँचल मे बच्चा जब जन्म लेता है \\
दुःख के थपेडो को सहकर , एक नारी ही सींचा करती है 

लक्ष्मी बनकर मे आती ,उपवन सा घर संसार चलाती है 
पत्नी के छवि मे वो ,जीवन भर साथ निभाती है \\
सात जन्मो के,सात कसमो को अपने माथो से लगाती है 
प्रेम की इस मर्यादा मे, एक ताजमहल बन जाता है\\
प्रकृति की इस रचना को हम सब  नारी कहते है 

साई की भी क्या रचना है,जो नारी ऐसी मृदभावन है 
कि दिमाग की जगह दिल दे डाला ,दिल की जगह दिमाग\\
जो वे दिल से ही सोचा करती है, दिल से  ही करा  करती है 

क्योकि दिल ही मे साई होता है 
उसकी ऐसी रचना को, हम बारम्बार नमन करते है\
ऐसी ही छवि को हम सब नारी कहते है\\





मै कवि हूँ जब तक पीडा है

सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी
होठों के संग नयनों को कुछ भाषाएँ देनी होंगी
हर विवश आँख के आँसू को
यूँ ही हँस हँस पीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

मनमोहन के आकर्षण मे भूली भटकी राधाऒं की
हर अभिशापित वैदेही को पथ मे मिलती बाधाऒं की
दे प्राण देह का मोह छुडाने वाली हाडा रानी की
मीराऒं की आँखों से झरते गंगाजल से पानी की
मुझको ही कथा सँजोनी है,
मुझको ही व्यथा पिरोनी है
स्मृतियाँ घाव भले ही दें
मुझको उनको सीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

मनमोहन के आकर्षण मे भूली भटकी राधाऒं की
हर अभिशापित वैदेही को पथ मे मिलती बाधाऒं की
दे प्राण देह का मोह छुडाने वाली हाडा रानी की
मीराऒं की आँखों से झरते गंगाजल से पानी की
मुझको ही कथा सँजोनी है,
मुझको ही व्यथा पिरोनी है
स्मृतियाँ घाव भले ही दें
मुझको उनको सीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

कलरव ने सूनापन सौंपा मुझको अभाव से भाव मिले
पीडाऒं से मुस्कान मिली हँसते फूलों से घाव मिले
सरिताऒं की मन्थर गति मे मैने आशा का गीत सुना
शैलों पर झरते मेघों में मैने जीवन-संगीत सुना
पीडा की इस मधुशाला में
आँसू की खारी हाला में
तन-मन जो आज डुबो देगा
वह ही युग का मीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीडा है
तब तक मुझको जीना होगा

Saturday, March 5, 2011

कुछ अधूरा सा रह गया

जरो  ही नजरो मे कोई दिल को भा गया 
इतना प्यारा  की  ,हमारा दिल हमारा ना रह गया 
हुस्न का अपने ,हमे वो दिवाना बना गया 
फिर इल्म हुआ, कुछ अधूरा सा रह गया 

उनके इश्क़ मे ,हमने खुद को भुला दिया 
ना जाने किस बात पर, वे खफा हो गये 
कि दुबारा फिर मुलाकात का, एक मौका ना दिया 
इस दिल्लागी मे ,कुछ अधूरा सा रह गया 

उनके आने की खबरो ने ,हमको धावक बना दिया 
नजरे उन पर  रूकी रही ,सूरज भी जैसे शीत हुआ 
उनके कोमल हाथो का, स्पर्श  हुआ तन को मेरे 
तन मेरा  चन्दन  बन जाये ,उनकी छुवन कुछ ऐसी थी 
एहसास हुआ तब जाकर मुझको, कुछ पूरा सा  हो गया 

आवाजे आयी जब उन अधरो से , तुम आना मेरी शादी मे 
अब दिल मेरा रो भी ना पाए ,जो दिल को उसने  चुरा लिया था 
उसके इन बातो ने , हमको शायर बना दिया 
अब इतना कह सकता हू बस ,तेरे बिन जीवन तो अधूरा रह गया

Tuesday, March 1, 2011

कुमार विश्वास

  • 1चाद ने कहा
 चाँद ने कहा है, एक बार फिर चकोर से,
इस जनम में भी जलेगे तुम ही मेरी और से
हर जनम का अपना चाँद है, चकोर है अलग,
यूँ जनम जनम का एक ही मछेरा है मगर,
हर जनम की मछलियाँ अलग हैं डोर है अलग,
डोर ने कहा है मछलियों की पोर-पोर से
इस जनम में भी बिंधोगी तुम ही मेरी ओर से
इस जनम में भी जलोगी तुम ही मेरी ओर से
   
यूँ अनंत सर्ग और ये कथा अनंत है
पंक से जनम लिया है पर कमल पवित्र है
यूँ जनम जनम का एक ही वो चित्रकार है 
हर जनम की तूलिका अलग, अलग ही चित्र है 
ये कहा है तूलिका ने, चित्र के चरित्र से 
इस जनम में भी सजोगे तुम ही मेरी कोर से 
चाँद ने कहा है एक बार फिर चकोर से     
इस जनम में भी जलोगी तुम ही मेरी ओर से

हर जनम के फूल हैं अलग, हैं तितलियाँ अलग
हर जनम की शोखियाँ अलग,  हैं सुर्खियाँ अलग
ध्वँस और सृजन का एक राग है अमर, मगर
हर जनम का आशियाँ अलग, है बिजलियाँ अलग
नीड़ से कहा है बिजलियों  ने जोर शोर से    
इस जनम में भी जलोगी तुम ही मेरी ओर से
इस जनम में भी मिटोगे तुम ही मेरी ओर से 
                                                 चाँद ने कहा है एक बार फिर चकोर
  • 2

    तुम अगर नहीं आयीं…गीत गा ना पाऊँगा.
    साँस साथ छोडेगी सुर सजा ना पाऊँगा..
    तान भावना की है..शब्द शब्द दर्पण है..
    बाँसुरी चली आओ..होट का निमन्त्रण है..

    तुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी है..
    तीर पार कान्हा से दूर राधिका सी है..
    दूरियाँ समझती हैं दर्द कैसे सहना है..
    आँख लाख चाहे पर होठ को ना कहना है
    औषधी चली आओ..चोट का निमन्त्रण है..
    बाँसुरी चली आओ होठ का निमन्त्रण है

    तुम अलग हुयीं मुझसे साँस की खताओं से
    भूख की दलीलों से वक़्त की सजाओं ने..
    रात की उदासी को आँसुओं ने झेला है
    कुछ गलत ना कर बैठे मन बहुत अकेला है
    कंचनी कसौटी को खोट ना निमन्त्रण है
    बाँसुरी चली आओ होठ का निमन्त्रण है

    ===================================

    ओ कल्पव्रक्ष की सोनजुही..
    ओ अमलताश की अमलकली.
    धरती के आतप से जलते..
    मन पर छाई निर्मल बदली..
    मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा
    तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा.
    तुम कल्पव्रक्ष का फूल और
    मैं धरती का अदना गायक
    तुम जीवन के उपभोग योग्य
    मैं नहीं स्वयं अपने लायक
    तुम नहीं अधूरी गजल सुभे
    तुम शाम गान सी पावन हो
    हिम शिखरों पर सहसा कौंधी
    बिजुरी सी तुम मनभावन हो.
    इसलिये व्यर्थ शब्दों वाला व्यापार नहीं दे पाऊँगा
    तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
    तुम जिस शय्या पर शयन करो
    वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो
    जिस आँगन की हो मौलश्री
    वह आँगन क्या व्रन्दावन हो
    जिन अधरों का चुम्बन पाओ
    वे अधर नहीं गंगातट हों
    जिसकी छाया बन साथ रहो
    वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो
    पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊँगा
    तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
    मै तुमको चाँद सितारों का
    सौंपू उपहार भला कैसे
    मैं यायावर बंजारा साँधू
    सुर श्रंगार भला कैसे
    मैन जीवन के प्रश्नों से नाता तोड तुम्हारे साथ सुभे
    बारूद बिछी धरती पर कर लूँ
    दो पल प्यार भला कैसे
    इसलिये विवष हर आँसू को सत्कार नहीं दे पाऊँगा
    तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा
    तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा

    ------------------------------------------------------------- 

                                                                                        पल भर में जीवन महकये 

                                                                                        पल भर में संसार जलाएं 

    कभी धुप हैं, कभी छाँव हैं 
    वुर्फ़ कभी अंगार 
    लड़कियां जैसे पहला प्यार 

    बचपन के जाते ही इनकी 
    गंध बसे तन मन में 
    एक कहानी लिख जाती हैं 
    ये सबके जीवन में 
    बचपन की ये विदा निशानी 
    यौवन का उपहार 
    लड़कियां जैसे पहला प्यार 

    इनके निर्णय बड़े अजब हैं 
    बड़ी अजब हैं बातें 
    दिन की कीमत पर,
    गिरबी रख देती हैं रातें 
    हंसते-गाते कर जाती हैं 
    आंसू का व्यापार
    लड़कियां जैसे पहला प्यार 

    जाने कैसे, कब कर बैठें 
    जान बूझकर भूलें 
    किसे प्यास से व्याकुल कर दें 
    किसे अधर से छू लें 
    किसका जीवन मरुथल कर दें 
    किसका मस्त बहार 
    लड़कियां जैसे पहला प्यार 

    इसकी खातिर भूखी-प्यासी 
    दहें रात भर जागें 
    उसकी पूजा को ठुकरायें 
    छाया से भी भागें 
    इसके सम्मुख छुई मुई हैं 
    उसको है तलवार 
    लड़कियां जैसे पहला प्यार 

    राजा के सपने मन में हैं 
    और फकीरों संग हैं 
    जीवन औरों के हाथों में 
    खींची लकीरों संग हैं 
    सपनों सी जगमग जगमग हैं 
    किस्मत सी लाचार 
    लड़कियां जैसे पहला प्यार
    ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- 
    मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हें  बतला रहा हूँ मैं
    कोई लब छू गया था तब अभी तक गा रहा हूँ मैं 
    फिराके यार में कैसे जिया जाये बिना तड़फे 
    जो मैं खुद ही नहीं समझा वही समझा रहा हूँ मैं  

    किसी पत्थर में मूरत है कोई पत्थर की मूरत है 
    लो हमने देख ली दुनिया जो इतनी ख़ूबसूरत है 
    ज़माना अपनी समझे पर मुझे अपनी खबर ये है 
    तुम्हें मेरी जरूरत है मुझे तेरी जरूरत है

     

Monday, February 28, 2011

हकिकत का सैलाब,,,

पहले के प्रेम और अब के प्रेम के अंतर को बयान ये पंक्तिया करती है........................
जो पहले के प्रेमी थे , प्रेमिका की यादो मे हर वक्त गुम्सुम थे।
प्रेमिक जो थी ऐसी, दिलो से मोहब्ब्त करती थी॥
अगर ये सत्य ना होता,तो ये ताज काहा होता।
जो किसी के इश्क का ,ऐसा गवाह नही होता॥

पर कहा गयी लोगो के दिल से ,ऐसी मोहब्बत वो,
अब तो प्रेमी भी प्रेमिका से कुछ चाह करता है।
प्रेमिका भी ऐसी है, सिर्फ पैसो से प्यार करती  है,

कभी खाने-पिने कि ,तो कभी हुस्न की फरियाद करती है॥

जरा सम्भलो ,ऐसे मोहब्बत वालो।
तुम्हारे इश्क़ मे तो, इतना भी नही है दम
ताज कि न करो बात ,ये खड्। क़र   सकता नही कागज क कोई महल


सफर्

अमिताभ बच्चन (जन्म-११ अक्तूबर) बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय अभिनेता है. १९७० के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तबसे भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख व्यक्तित्व बन गए हैं।
  बच्चन का विवाह अभिनेत्री जया भादुड़ी से हुआ है। इनके दो संतान हैं, श्वेता नंदा और अभिषेक बच्चन, जो एक अभिनेता भी हैं और जिनका विवाह ऐश्वर्या राय से हुआ है।
  •  अमिताभ बच्चन हिंदू कायस्थ परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता, डॉ. हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध हिन्दी कवि थे, जबकि उनकी मां तेजी बच्चन कराची के सिख परिवार से संबंध रखती थीं (अब पाकिस्तान) में.[१]आरंभ में बच्चन का नाम इंकलाब रखा गया था जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रयोग में किए गए प्रेरित वाक्यांश इंकलाब जिंदाबाद, से लिया गया था लेकिन बाद में इनका फिर से अमिताभ नाम रख दिया गया जिसका अर्थ है, ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा। यद्यपि इनका अंतिम नाम श्रीवास्तव था फिर भी इनके पिता ने इस उपनाम को अपने कृतियों को प्रकाशित करने वाले बच्चन नाम से उद्धृत किया। यह उनका अंतिम नाम ही है जिसके साथ उन्होंने फिल्मों में एवं सभी सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किया अब यह उनके परिवार के समस्त सदस्यों का उपनाम बन गया है। अमिताभ, हरिवंश राय बच्चन के दो बेटो में सबसे बड़े हैं उनके दूसरे बेटे का नाम अजिताभ है। इनकी माता की थिएटर में गहरी रुचि थी और उन्हें फिल्म में भी रोल की पेशकश की गई थी किंतु इन्होंने गृहणि बनना ही पसंद किया। अमिताभ के कैरियर के चुनाव में इनकी माता का भी कुछ हिस्सा था क्योंकि वे हमेशा इस बात पर भी जोर देती थी कि उन्हें सेंटर स्टेज को अपना कैरियर बनाना चाहिए।[२] बच्चन के पिता का देहांत २००३ में हो गया था जबकि उनकी माता की मृत्यु २१ दिसंबर २००७[३] को हुई थीं
  • १९८२ में कुली (Coolie) फिल्म में बच्चन ने अपने सह कलाकार पुनीत इस्सर (Puneet Issar)[१४] के साथ एक फाइट की शूटिंग के दौरान अपनी आंतों को लगभग घायल कर लिया था। बच्चन ने इस फिल्म में स्टंट अपनी मर्जी से करने की छूट ले ली थी जिसके एक सीन में इन्हें मेज पर गिरना था और उसके बाद जमीन पर गिरना था। हालांकि जैसे ही ये मेज की ओर कूदे तब मेज का कोना इनके पेट से टकराया जिससे इनके आंतों को चोट पहुंची और इनके शरीर से काफी खून बह निकला था। इन्हें जहाज से फोरन स्पलेनक्टोमी के उपचार हेतु अस्पताल ले जाया गया और वहां ये कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे और कई बार मौत के मुंह में जाते जाते बचे। यह अफ़वाह भी फैल भी गई थी, कि वे एक दुर्घटना में मर गए हैं और संपूर्ण देश में इनके चाहने वालों की भारी भीड इनकी रक्षा के लिए दुआएं करने में जुट गयी थी.इस दुर्घटना की खबर दूर दूर तक फैल गई और यूके के अखबारों की सुर्खियों में छपने लगी जिसके बारे में कभी किसने सुना भी नहीं होगा। बहुत से भारतीयों ने मंदिरों में पूजा अर्चनाएं की और इन्हें बचाने के लिए अपने अंग अर्पण किए और बाद में जहां इनका उपचार किया जा रहा था उस अस्पताल के बाहर इनके चाहने वालों की मीलों लंबी कतारें दिखाई देती थी.[१५] तिसपर भी इन्होंने ठीक होने में कई महीने ले लिए और उस साल के अंत में एक लंबे अरसे के बाद पुन: काम करना आरंभ किया। यह फिल्म १९८३ में रिलीज हुई और आंशिक तौर पर बच्चन की दुर्घटना के असीम प्रचार के कारण बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।[१६]
निर्देशक मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) ने कुली (Coolie) फिल्म में बच्चन की दुर्घटना के बाद फ़िल्म के कहानी का अंत बदल दिया था। इस फिल्म में बच्चन के चरित्र को वास्तव में मृत्यु प्राप्त होनी थी लेकिन बाद में स्क्रिप्‍ट में परिवर्तन करने के बाद उसे अंत में जीवित दिखाया गया। देसाई ने इनके बारे में कहा था कि ऐसे आदमी के लिए यह कहना बिल्‍कुल अनुपयुक्त होगा कि जो असली जीवन में मौत से लड़कर जीता हो उसे परदे पर मौत अपना ग्रास बना ले। इस रिलीज फिल्म में पहले सीन के अंत को जटिल मोड़ पर रोक दिया गया था और उसके नीचे एक केप्‍शन प्रकट होने लगा जिसमें अभिनेता के घायल होने की बात लिखी गई थी और इसमें दुर्घटना के प्रचार को सुनिश्चित किया गया था।[१५]
बाद में ये मियासथीनिया ग्रेविस (Myasthenia gravis) में उलझ गए जो या कुली में दुर्घटना के चलते या तो भारीमात्रा में दवाई लेने से हुआ या इन्हें जो बाहर से अतिरिक्त रक्त दिया गया था इसके कारण हुआ। उनकी बीमारी ने उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कमजोर महसूस करने पर मजबूर कर दिया और उन्होंने फिल्मों में काम करने से सदा के लिए छुट्टी लेने और राजनीति में शामिल होने का निर्णन किया। यही वह समय था जब उनके मन में फिल्म कैरियर के संबंध में निराशावादी विचारधारा का जन्म हुआ और प्रत्येक शुक्रवार को रिलीज होने वाली नई फिल्म के प्रत्युत्तर के बारे में चिंतित रहते थे। प्रत्येक रिलीज से पहले वह नकारात्मक रवैये में जवाब देते थे कि यह फिल्म तो फ्लाप होगी।.[१७]
१९६९ सात हिंदुस्तानी अनवर अली विजेता, सर्वश्रेष्ठ नवागंतुक राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
भुवन शोम (Bhuvan Shome) कमेन्टेटर ( स्वर )
१९७१ परवाना (Parwaana) कुमार सेन
आनंद (Anand) डॉ. कुमार भास्करबनर्जी / बाबू मोशाय विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
रेश्मा और शेरा (Reshma Aur Shera) छोटू
गुड्डी (Guddi) खुद
प्यार की कहानी (Pyar Ki Kahani) राम चन्द्र
१९७२ संजोग (Sanjog) मोहन
बंसी बिरजू (Bansi Birju) बिरजू
पिया का घर (Piya Ka Ghar)
अतिथि उपस्थिति
एक नज़र (Ek Nazar) मनमोहन आकाश त्यागी
बावर्ची (Bawarchi) वर्णन करने वाला
रास्ते का पत्थर (Raaste Ka Patthar) जय शंकर राय
बॉम्बे टू गोवा (Bombay to Goa) रवि कुमार
१९७३ बड़ा कबूतर (Bada Kabootar)
अतिथि उपस्थिति
बंधे हाथ (Bandhe Haath) शामू और दीपक दोहरी भूमिका
ज़ंजीर (Zanjeer) इंस्पेक्टर विजय खन्ना मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
गहरी चाल (Gehri Chaal) रतन
अभिमान (Abhimaan) सुबीर कुमार
सौदागर ( १९७३ फ़िल्म ) (Saudagar (1973 film)) मोती
नमक हराम (Namak Haraam) विक्रम (विक्की) विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
१९७४ कुँवारा बाप (Kunwara Baap) ऍगस्टीन अतिथि उपस्थिति
दोस्त (Dost) आनंद अतिथि उपस्थिति
कसौटी (Kasauti) अमिताभ शर्मा ( अमित )
बेनाम (Benaam) अमित श्रीवास्तव
रोटी कपड़ा और मकान (Roti Kapda Aur Makaan) विजय
मजबूर (Majboor) रवि खन्ना
१९७५ चुपके चुपके सुकुमार सिन्हा / परिमल त्रिपाठी
फरार (Faraar) राजेश ( राज )
मिली (Mili) शेखर दयाल
दीवार (Deewar) विजय वर्मा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
ज़मीर (Zameer) बादल / चिम्पू
शोले (Sholay) जय ( जयदेव )
१९७६ दो अनजाने (Do Anjaane) अमित रॉय / नरेश दत्त
छोटी सी बात (Chhoti Si Baat)
विशेष उपस्थिति
कभी कभी (Kabhi Kabhie) अमित मल्होत्रा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
हेराफेरी (Hera Pheri) विजय / इंस्पेक्टर हीराचंद
१९७७ आलाप (Alaap) आलोक प्रसाद
चरणदास (Charandas) कव्वाली गायक विशेष उपस्थिति
अमर अकबर एंथोनी (Amar Akbar Anthony) एंथोनी गॉन्सॉल्वेज़ विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
शतरंज के खिलाड़ी वर्णन करने वाला
अदालत (Adalat) धर्म / व राजू मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार.
दोहरी भूमिका
इमान धर्म (Imaan Dharam) अहमद रजा
खून पसीना (Khoon Pasina) शिवा/टाइगर
परवरिश (Parvarish) अमित
१९७८ बेशरम (Besharam) राम चन्द्र कुमार /
प्रिंस चंदशेखर

गंगा की सौगंध (Ganga Ki Saugandh) जीवा
कसमें वादे (Kasme Vaade) अमित / शंकर दोहरी भूमिका
त्रिशूल (Trishul) विजय कुमार मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
डॉन (Don) डॉन / विजय विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार.
दोहरी भूमिका
मुकद्दर का सिकंदर (Muqaddar Ka Sikandar) सिकंदर मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९७९ द ग्रेट गैम्बलर (The Great Gambler) जय / इंस्पेक्टर विजय दोहरी भूमिका
गोलमाल (Golmaal) खुद विशेष उपस्थिति
जुर्माना (Jurmana) इन्दर सक्सेना
मंज़िल (Manzil) अजय चन्द्र
मि० नटवरलाल (Mr. Natwarlal) नटवरलाल / अवतार सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार और पुरुष पार्श्वगायक का सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार (Filmfare Best Male Playback Award)
काला पत्थर (Kaala Patthar) विजय पाल सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
सुहाग (Suhaag) अमित कपूर
१९८० दो और दो पाँच (Do Aur Do Paanch) विजय / राम
दोस्ताना (Dostana) विजय वर्मा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
राम बलराम (Ram Balram) इंस्पेक्टर बलराम सिंह
शान (Shaan) विजय कुमार
१९८१ चश्मेबद्दूर (Chashme Buddoor)
विशेष उपस्थिति
कमांडर (Commander)
अतिथि उपस्थिति
नसीब (Naseeb) जॉन जॉनी जनार्दन
बरसात की एक रात (Barsaat Ki Ek Raat) एसीपी अभिजीत राय
लावारिस (Lawaaris) हीरा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
सिलसिला ( फिल्म ) अमित मल्होत्रा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
याराना (Yaraana) किशन कुमार
कालिया (Kaalia) कल्लू / कालिया
१९८२ सत्ते पे सत्ता (Satte Pe Satta) रवि आनंद और बाबू दोहरी भूमिका
बेमिसाल (Bemisaal) डॉ. सुधीर रॉय और अधीर राय मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार.
दोहरी भूमिका
देश प्रेमी (Desh Premee) मास्टर दीनानाथ और राजू दोहरी भूमिका
नमक हलाल (Namak Halaal) अर्जुन सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
खुद्दार (Khud-Daar) गोविंद श्रीवास्तव / छोटू उस्ताद
शक्ति (Shakti) विजय कुमार मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९८३ नास्तिक (Nastik) शंकर ( शेरू ) / भोला
अंधा क़ानून (Andha Kanoon) जान निसार अख़्तर खान मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार.
अतिथि उपस्थिति
महान (Mahaan) राणा रनवीर, गुरु , और इंस्पेक्टर शंकर ट्रिपल भूमिका
पुकार (Pukar) रामदास / रोनी
कुली (Coolie) इकबाल ए .खान
१९८४ इंकलाब (Inquilaab) अमरनाथ
शराबी (Sharaabi) विक्की कपूर मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९८५ गिरफ्तार (Giraftaar) इंस्पेक्टर करण कुमार खन्ना
मर्द (Mard) राजू " मर्द " तांगेवाला मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९८६ एक रूका हुआ फैसला (Ek Ruka Hua Faisla)
अतिथि उपस्थिति
आखिरी रास्ता (Aakhree Raasta) डेविड / विजय दोहरी भूमिका
१९८७ जलवा (Jalwa) खुद विशेष उपस्थिति
कौन जीता कौन हारा (Kaun Jeeta Kaun Haara) खुद अतिथि उपस्थिति
१९८८ सूरमा भोपाली (Soorma Bhopali)
अतिथि उपस्थिति
शहंशाह (Shahenshah) इंस्पेक्टर विजय कुमार श्रीवास्तव
/ शहंशाह
मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
हीरो हीरालाल (Hero Hiralal) खुद विशेष उपस्थिति
गंगा जमुना सरस्वती (Ganga Jamuna Saraswati) गंगा प्रसाद
१९८९ बंटवारा (Batwara) वर्णन करने वाला
तूफान (Toofan) तूफान और श्याम दोहरी भूमिका
जादूगर (Jaadugar) गोगा गोगेश्‍वर
मैं आज़ाद हूँ (Main Azaad Hoon) आज़ाद
१९९० अग्निपथ (Agneepath) विजय दीनानाथ चौहान विजेता,सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार (National Film Award for Best Actor) और मनोनीत फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार,
क्रोध (Krodh)
विशेष उपस्थिति
आज का अर्जुन (Aaj Ka Arjun) भीमा
१९९१ हम (Hum) टाइगर / शेखर विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
अजूबा (Ajooba) अजूबा / अली
इन्द्रजीत (Indrajeet) इन्द्रजीत
अकेला (Akayla) इंस्पेक्टर विजय वर्मा
१९९२ खुदागवाह (Khuda Gawah) बादशाह खान मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९९४ इन्सानियत (Insaniyat) इंस्पेक्टर अमर
१९९६ तेरे मेरे सपने (Tere Mere Sapne) वर्णन करने वाला
१९९७ मृत्युदाता (Mrityudata) डॉ. राम प्रसाद घायल
१९९८ मेजर साब (Major Saab) मेजर जसबीर सिंह राणा
बड़े मियाँ छोटे मियाँ (Bade Miyan Chhote Miyan) इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह और बड़े मियाँ दोहरी भूमिका
१९९९ लाल बादशाह (Lal Baadshah) लाल " बादशाह " सिंह और रणबीर सिंह दोहरी भूमिका
सूर्यवंशम (Sooryavansham) भानु प्रताप सिंह ठाकुर और हीरा सिंह दोहरी भूमिका
हिंदुस्तान की कसम (Hindustan Ki Kasam) कबीरा
कोहराम (Kohram) कर्नलबलबीर सिंह सोढी ( देवराज हथौड़ा)
और दादा भाई

हैलो ब्रदर (Hello Brother) व्हाइस ऑफ गोड
२००० मोहब्बतें नारायण शंकर विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
२००१ एक रिश्ता (Ek Rishtaa) विजय कपूर
लगान वर्णन करने वाला
अक्स (Aks) मनु वर्मा विजेता, फ़िल्म समीक्षक पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (Filmfare Critics Award for Best Performance) और मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
कभी ख़ुशी कभी ग़म यशवर्धन यश रायचंद मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
२००२ आंखें (Aankhen) विजय सिंह राजपूत मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
हम किसी से कम नहीं (Hum Kisise Kum Nahi) डॉ. रस्तोगी
अग्नि वर्षा (Agni Varsha) इंद्र ( परमेश्वर ) विशेष उपस्थिति
कांटे (Kaante) यशवर्धन रामपाल / " मेजर " मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
२००३ खुशी (Khushi) वर्णन करने वाला
अरमान (Armaan) डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा
मुंबई से आया मेरा दोस्त (Mumbai Se Aaya Mera Dost) वर्णन करने वाला
बूम बड़े मिया
बागबान (Baghban) राज मल्होत्रा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
फ़नटूश (Fun2shh) वर्णन करने वाला
२००४ खाकी (Khakee) डीसीपीअनंत कुमार श्रीवास्तव मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
एतबार (Aetbaar) डॉ.रनवीर मल्होत्रा
रूद्राक्ष (Rudraksh) वर्णन करने वाला
इंसाफ (Insaaf) वर्णन करने वाला
देव डीसीपीदेव प्रताप सिंह
लक्ष्य (Lakshya) कर्नलसुनील दामले
दीवार (Deewaar) मेजर रणवीर कौल
क्यूं...!हो गया ना (Kyun...! Ho Gaya Na) राज चौहान
हम कौन है (Hum Kaun Hai) जॉन मेजर विलियम्स और
फ्रैंक जेम्स विलियम्स
दोहरी भूमिका
वीर - जारा (Veer-Zaara) सुमेर सिंह चौधरी मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार.
विशेष उपस्थिति
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो (Ab Tumhare Hawale Watan Saathiyo) मेजर जनरल अमरजीत सिंह
२००५ ब्लेक (Black) देवराज सहाय दोहरे विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार & फ़िल्म समीक्षक पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (Filmfare Critics Award for Best Performance).
विजेता, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (National Film Award for Best Actor)
वक़्त (Waqt) ईश्‍वरचंद्र शरावत
बंटी और बबली (Bunty Aur Babli) डीसीपीदशरथ सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
परिणीता (Parineeta) वर्णन करने वाला
पहेली (Paheli) गड़रिया विशेष उपस्थिति
सरकार (Sarkar) सुभाष नागरे / " सरकार " मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
विरूद्ध (Viruddh) विद्याधर पटवर्धन
रामजी लंदनवाले (Ramji Londonwaley) खुद विशेष उपस्थिति
दिल जो भी कहे (Dil Jo Bhi Kahey...) शेखर सिन्हा
एक अजनबी सूर्यवीर सिंह
अमृतधारा खुद विशेष उपस्थिति कन्नड़ फिल्म
२००६ परिवार (Family) वीरेन साही
डरना जरूरी है (Darna Zaroori Hai) प्रोफेसर
कभी अलविदा न कहना (Kabhi Alvida Naa Kehna) समरजित सिंह तलवार ( आका.सेक्सी सैम ) मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
बाबुल (Baabul) बलराज कपूर
२००७ Eklavya: The Royal Guard एकलव्य
निशब्द (Nishabd) विजय
चीनी कम बुद्धदेव गुप्ता
शूटआउट एट लोखंडवाला (Shootout at Lokhandwala) डिंगरा विशेष उपस्थिति
झूम बराबर झूम (Jhoom Barabar Jhoom) सूत्रधार विशेष उपस्थिति
राम गोपाल वर्मा की आग (Ram Gopal Varma Ki Aag) बब्बन सिंह
ओम शांति ओम (Om Shanti Om) खुद विशेष उपस्थिति
द लास्ट लियऱ (The Last Lear) हरीश मिश्रा
२००८ यार मेरी जिंदगी (Yaar Meri Zindagi)
४ अप्रैल, २००८ को रिलीज
भूतनाथ (Bhoothnath) भूतनाथ ( कैलाश नाथ )
सरकार राज (Sarkar Raj) सुभाष नाग्रे / " सरकार " रिलीज हो गई
गोड तुस्सी ग्रेट हो (God Tussi Great Ho) सर्वशक्तिमान ईश्वर १५ अगस्त, २००८ को रिलीज हो रही है।
जमानत (Zamaanat) शिव शंकर उत्पादन के बाद

अलादीन (Aladin) जिन (Jin) फिल्मांकन समाप्त
तालिसमान (Talismaan)
फिल्मांकन
अपवर्जन (Exclusion)
फिल्मांकन
२००९ शांताराम[५४] खादर भाई