1-तबले की थाप तब आती है,
जब बान्सुरी अपनी छाप छोडे जाती है
हर एक धुन मे, किसी की शहनाई याद आती है
फ़िर भी दिल की आरजू है इतनी ,जो कभी पूरी नही हो पाती
2-तबले की हर एक थाप पे तो ,पूरी दुनिया झूम जाती है
जरा उस तबले से एक बार तो पूछ लो, कि क्या वो कभी मुस्कुराती है
हर दर्द के एक आहट से वो तड्प जाती है
फ़िर भी महफ़िल मे बैथे चेहरो पे वो तबला ही हसी लाती है
3-दिया पूछ्ता नही रोशनी से ,कि तुम्हे अब कितना जलना है
अपनी हर सास तक वो रोशनी को सहारा देता है
रोशनी कि बरक्कत की खातिर खुद को कालिख कर लेता है
रोशनी चली जाती है फ़िर भी ,दिया उसकी यादो का आखो मे सूरमा सजाय रखता है
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