Monday, February 28, 2011

हकिकत का सैलाब,,,

पहले के प्रेम और अब के प्रेम के अंतर को बयान ये पंक्तिया करती है........................
जो पहले के प्रेमी थे , प्रेमिका की यादो मे हर वक्त गुम्सुम थे।
प्रेमिक जो थी ऐसी, दिलो से मोहब्ब्त करती थी॥
अगर ये सत्य ना होता,तो ये ताज काहा होता।
जो किसी के इश्क का ,ऐसा गवाह नही होता॥

पर कहा गयी लोगो के दिल से ,ऐसी मोहब्बत वो,
अब तो प्रेमी भी प्रेमिका से कुछ चाह करता है।
प्रेमिका भी ऐसी है, सिर्फ पैसो से प्यार करती  है,

कभी खाने-पिने कि ,तो कभी हुस्न की फरियाद करती है॥

जरा सम्भलो ,ऐसे मोहब्बत वालो।
तुम्हारे इश्क़ मे तो, इतना भी नही है दम
ताज कि न करो बात ,ये खड्। क़र   सकता नही कागज क कोई महल


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