Sunday, March 13, 2011

इसमे क्या मेरी खता है

एक वक्त था जब तेरी चाह मे हम जिये जा रहे 
ये भरी  महफिल को पता था कि तुमसे प्यार है 
पर वो वक्त का दौर थ जकि तुम्हे बता ना सके \\
दिल की बातो को दिल मे छुपा कर रख लिया 
इजहार-ए-इश्क़ ना कर सके इसमे क्या मेरी खता है\\


फिर भी तेरी यादो मे हम किस्मत लिखा करते है 
तेरा एहसास ही एक सहारा थी ,जिसने हमे सम्भाला था 
घनघोर बदरिया ऐसी थी ,बिजली भी चमका करती  थी \\
पर सामने तेरे आने से मेरी जुबा रूक जाती थी 
जरा अपने दिल से पूछके बताना  इसमे क्या मेरी खता है \\


यादो के उन तारो स्रए हम सन्देशा  भेजवाया करते थे 
हम तो अपने दिल की आहट भी तुम तक पहुचाया  करते थे\\
शायद तुम तक ही मेरे दिल की आवाजे ना पहुची हो 
आखिर दिल मेरा तो  टूट गया ,इसमे क्या मेरी खता है\\







 

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