Monday, February 28, 2011

सफर्

अमिताभ बच्चन (जन्म-११ अक्तूबर) बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय अभिनेता है. १९७० के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तबसे भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख व्यक्तित्व बन गए हैं।
  बच्चन का विवाह अभिनेत्री जया भादुड़ी से हुआ है। इनके दो संतान हैं, श्वेता नंदा और अभिषेक बच्चन, जो एक अभिनेता भी हैं और जिनका विवाह ऐश्वर्या राय से हुआ है।
  •  अमिताभ बच्चन हिंदू कायस्थ परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता, डॉ. हरिवंश राय बच्चन प्रसिद्ध हिन्दी कवि थे, जबकि उनकी मां तेजी बच्चन कराची के सिख परिवार से संबंध रखती थीं (अब पाकिस्तान) में.[१]आरंभ में बच्चन का नाम इंकलाब रखा गया था जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान प्रयोग में किए गए प्रेरित वाक्यांश इंकलाब जिंदाबाद, से लिया गया था लेकिन बाद में इनका फिर से अमिताभ नाम रख दिया गया जिसका अर्थ है, ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा। यद्यपि इनका अंतिम नाम श्रीवास्तव था फिर भी इनके पिता ने इस उपनाम को अपने कृतियों को प्रकाशित करने वाले बच्चन नाम से उद्धृत किया। यह उनका अंतिम नाम ही है जिसके साथ उन्होंने फिल्मों में एवं सभी सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए उपयोग किया अब यह उनके परिवार के समस्त सदस्यों का उपनाम बन गया है। अमिताभ, हरिवंश राय बच्चन के दो बेटो में सबसे बड़े हैं उनके दूसरे बेटे का नाम अजिताभ है। इनकी माता की थिएटर में गहरी रुचि थी और उन्हें फिल्म में भी रोल की पेशकश की गई थी किंतु इन्होंने गृहणि बनना ही पसंद किया। अमिताभ के कैरियर के चुनाव में इनकी माता का भी कुछ हिस्सा था क्योंकि वे हमेशा इस बात पर भी जोर देती थी कि उन्हें सेंटर स्टेज को अपना कैरियर बनाना चाहिए।[२] बच्चन के पिता का देहांत २००३ में हो गया था जबकि उनकी माता की मृत्यु २१ दिसंबर २००७[३] को हुई थीं
  • १९८२ में कुली (Coolie) फिल्म में बच्चन ने अपने सह कलाकार पुनीत इस्सर (Puneet Issar)[१४] के साथ एक फाइट की शूटिंग के दौरान अपनी आंतों को लगभग घायल कर लिया था। बच्चन ने इस फिल्म में स्टंट अपनी मर्जी से करने की छूट ले ली थी जिसके एक सीन में इन्हें मेज पर गिरना था और उसके बाद जमीन पर गिरना था। हालांकि जैसे ही ये मेज की ओर कूदे तब मेज का कोना इनके पेट से टकराया जिससे इनके आंतों को चोट पहुंची और इनके शरीर से काफी खून बह निकला था। इन्हें जहाज से फोरन स्पलेनक्टोमी के उपचार हेतु अस्पताल ले जाया गया और वहां ये कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहे और कई बार मौत के मुंह में जाते जाते बचे। यह अफ़वाह भी फैल भी गई थी, कि वे एक दुर्घटना में मर गए हैं और संपूर्ण देश में इनके चाहने वालों की भारी भीड इनकी रक्षा के लिए दुआएं करने में जुट गयी थी.इस दुर्घटना की खबर दूर दूर तक फैल गई और यूके के अखबारों की सुर्खियों में छपने लगी जिसके बारे में कभी किसने सुना भी नहीं होगा। बहुत से भारतीयों ने मंदिरों में पूजा अर्चनाएं की और इन्हें बचाने के लिए अपने अंग अर्पण किए और बाद में जहां इनका उपचार किया जा रहा था उस अस्पताल के बाहर इनके चाहने वालों की मीलों लंबी कतारें दिखाई देती थी.[१५] तिसपर भी इन्होंने ठीक होने में कई महीने ले लिए और उस साल के अंत में एक लंबे अरसे के बाद पुन: काम करना आरंभ किया। यह फिल्म १९८३ में रिलीज हुई और आंशिक तौर पर बच्चन की दुर्घटना के असीम प्रचार के कारण बॉक्स ऑफिस पर सफल रही।[१६]
निर्देशक मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) ने कुली (Coolie) फिल्म में बच्चन की दुर्घटना के बाद फ़िल्म के कहानी का अंत बदल दिया था। इस फिल्म में बच्चन के चरित्र को वास्तव में मृत्यु प्राप्त होनी थी लेकिन बाद में स्क्रिप्‍ट में परिवर्तन करने के बाद उसे अंत में जीवित दिखाया गया। देसाई ने इनके बारे में कहा था कि ऐसे आदमी के लिए यह कहना बिल्‍कुल अनुपयुक्त होगा कि जो असली जीवन में मौत से लड़कर जीता हो उसे परदे पर मौत अपना ग्रास बना ले। इस रिलीज फिल्म में पहले सीन के अंत को जटिल मोड़ पर रोक दिया गया था और उसके नीचे एक केप्‍शन प्रकट होने लगा जिसमें अभिनेता के घायल होने की बात लिखी गई थी और इसमें दुर्घटना के प्रचार को सुनिश्चित किया गया था।[१५]
बाद में ये मियासथीनिया ग्रेविस (Myasthenia gravis) में उलझ गए जो या कुली में दुर्घटना के चलते या तो भारीमात्रा में दवाई लेने से हुआ या इन्हें जो बाहर से अतिरिक्त रक्त दिया गया था इसके कारण हुआ। उनकी बीमारी ने उन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कमजोर महसूस करने पर मजबूर कर दिया और उन्होंने फिल्मों में काम करने से सदा के लिए छुट्टी लेने और राजनीति में शामिल होने का निर्णन किया। यही वह समय था जब उनके मन में फिल्म कैरियर के संबंध में निराशावादी विचारधारा का जन्म हुआ और प्रत्येक शुक्रवार को रिलीज होने वाली नई फिल्म के प्रत्युत्तर के बारे में चिंतित रहते थे। प्रत्येक रिलीज से पहले वह नकारात्मक रवैये में जवाब देते थे कि यह फिल्म तो फ्लाप होगी।.[१७]
१९६९ सात हिंदुस्तानी अनवर अली विजेता, सर्वश्रेष्ठ नवागंतुक राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार
भुवन शोम (Bhuvan Shome) कमेन्टेटर ( स्वर )
१९७१ परवाना (Parwaana) कुमार सेन
आनंद (Anand) डॉ. कुमार भास्करबनर्जी / बाबू मोशाय विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
रेश्मा और शेरा (Reshma Aur Shera) छोटू
गुड्डी (Guddi) खुद
प्यार की कहानी (Pyar Ki Kahani) राम चन्द्र
१९७२ संजोग (Sanjog) मोहन
बंसी बिरजू (Bansi Birju) बिरजू
पिया का घर (Piya Ka Ghar)
अतिथि उपस्थिति
एक नज़र (Ek Nazar) मनमोहन आकाश त्यागी
बावर्ची (Bawarchi) वर्णन करने वाला
रास्ते का पत्थर (Raaste Ka Patthar) जय शंकर राय
बॉम्बे टू गोवा (Bombay to Goa) रवि कुमार
१९७३ बड़ा कबूतर (Bada Kabootar)
अतिथि उपस्थिति
बंधे हाथ (Bandhe Haath) शामू और दीपक दोहरी भूमिका
ज़ंजीर (Zanjeer) इंस्पेक्टर विजय खन्ना मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
गहरी चाल (Gehri Chaal) रतन
अभिमान (Abhimaan) सुबीर कुमार
सौदागर ( १९७३ फ़िल्म ) (Saudagar (1973 film)) मोती
नमक हराम (Namak Haraam) विक्रम (विक्की) विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
१९७४ कुँवारा बाप (Kunwara Baap) ऍगस्टीन अतिथि उपस्थिति
दोस्त (Dost) आनंद अतिथि उपस्थिति
कसौटी (Kasauti) अमिताभ शर्मा ( अमित )
बेनाम (Benaam) अमित श्रीवास्तव
रोटी कपड़ा और मकान (Roti Kapda Aur Makaan) विजय
मजबूर (Majboor) रवि खन्ना
१९७५ चुपके चुपके सुकुमार सिन्हा / परिमल त्रिपाठी
फरार (Faraar) राजेश ( राज )
मिली (Mili) शेखर दयाल
दीवार (Deewar) विजय वर्मा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
ज़मीर (Zameer) बादल / चिम्पू
शोले (Sholay) जय ( जयदेव )
१९७६ दो अनजाने (Do Anjaane) अमित रॉय / नरेश दत्त
छोटी सी बात (Chhoti Si Baat)
विशेष उपस्थिति
कभी कभी (Kabhi Kabhie) अमित मल्होत्रा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
हेराफेरी (Hera Pheri) विजय / इंस्पेक्टर हीराचंद
१९७७ आलाप (Alaap) आलोक प्रसाद
चरणदास (Charandas) कव्वाली गायक विशेष उपस्थिति
अमर अकबर एंथोनी (Amar Akbar Anthony) एंथोनी गॉन्सॉल्वेज़ विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
शतरंज के खिलाड़ी वर्णन करने वाला
अदालत (Adalat) धर्म / व राजू मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार.
दोहरी भूमिका
इमान धर्म (Imaan Dharam) अहमद रजा
खून पसीना (Khoon Pasina) शिवा/टाइगर
परवरिश (Parvarish) अमित
१९७८ बेशरम (Besharam) राम चन्द्र कुमार /
प्रिंस चंदशेखर

गंगा की सौगंध (Ganga Ki Saugandh) जीवा
कसमें वादे (Kasme Vaade) अमित / शंकर दोहरी भूमिका
त्रिशूल (Trishul) विजय कुमार मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
डॉन (Don) डॉन / विजय विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार.
दोहरी भूमिका
मुकद्दर का सिकंदर (Muqaddar Ka Sikandar) सिकंदर मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९७९ द ग्रेट गैम्बलर (The Great Gambler) जय / इंस्पेक्टर विजय दोहरी भूमिका
गोलमाल (Golmaal) खुद विशेष उपस्थिति
जुर्माना (Jurmana) इन्दर सक्सेना
मंज़िल (Manzil) अजय चन्द्र
मि० नटवरलाल (Mr. Natwarlal) नटवरलाल / अवतार सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार और पुरुष पार्श्वगायक का सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म पुरस्कार (Filmfare Best Male Playback Award)
काला पत्थर (Kaala Patthar) विजय पाल सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
सुहाग (Suhaag) अमित कपूर
१९८० दो और दो पाँच (Do Aur Do Paanch) विजय / राम
दोस्ताना (Dostana) विजय वर्मा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
राम बलराम (Ram Balram) इंस्पेक्टर बलराम सिंह
शान (Shaan) विजय कुमार
१९८१ चश्मेबद्दूर (Chashme Buddoor)
विशेष उपस्थिति
कमांडर (Commander)
अतिथि उपस्थिति
नसीब (Naseeb) जॉन जॉनी जनार्दन
बरसात की एक रात (Barsaat Ki Ek Raat) एसीपी अभिजीत राय
लावारिस (Lawaaris) हीरा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
सिलसिला ( फिल्म ) अमित मल्होत्रा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
याराना (Yaraana) किशन कुमार
कालिया (Kaalia) कल्लू / कालिया
१९८२ सत्ते पे सत्ता (Satte Pe Satta) रवि आनंद और बाबू दोहरी भूमिका
बेमिसाल (Bemisaal) डॉ. सुधीर रॉय और अधीर राय मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार.
दोहरी भूमिका
देश प्रेमी (Desh Premee) मास्टर दीनानाथ और राजू दोहरी भूमिका
नमक हलाल (Namak Halaal) अर्जुन सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
खुद्दार (Khud-Daar) गोविंद श्रीवास्तव / छोटू उस्ताद
शक्ति (Shakti) विजय कुमार मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९८३ नास्तिक (Nastik) शंकर ( शेरू ) / भोला
अंधा क़ानून (Andha Kanoon) जान निसार अख़्तर खान मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार.
अतिथि उपस्थिति
महान (Mahaan) राणा रनवीर, गुरु , और इंस्पेक्टर शंकर ट्रिपल भूमिका
पुकार (Pukar) रामदास / रोनी
कुली (Coolie) इकबाल ए .खान
१९८४ इंकलाब (Inquilaab) अमरनाथ
शराबी (Sharaabi) विक्की कपूर मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९८५ गिरफ्तार (Giraftaar) इंस्पेक्टर करण कुमार खन्ना
मर्द (Mard) राजू " मर्द " तांगेवाला मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९८६ एक रूका हुआ फैसला (Ek Ruka Hua Faisla)
अतिथि उपस्थिति
आखिरी रास्ता (Aakhree Raasta) डेविड / विजय दोहरी भूमिका
१९८७ जलवा (Jalwa) खुद विशेष उपस्थिति
कौन जीता कौन हारा (Kaun Jeeta Kaun Haara) खुद अतिथि उपस्थिति
१९८८ सूरमा भोपाली (Soorma Bhopali)
अतिथि उपस्थिति
शहंशाह (Shahenshah) इंस्पेक्टर विजय कुमार श्रीवास्तव
/ शहंशाह
मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
हीरो हीरालाल (Hero Hiralal) खुद विशेष उपस्थिति
गंगा जमुना सरस्वती (Ganga Jamuna Saraswati) गंगा प्रसाद
१९८९ बंटवारा (Batwara) वर्णन करने वाला
तूफान (Toofan) तूफान और श्याम दोहरी भूमिका
जादूगर (Jaadugar) गोगा गोगेश्‍वर
मैं आज़ाद हूँ (Main Azaad Hoon) आज़ाद
१९९० अग्निपथ (Agneepath) विजय दीनानाथ चौहान विजेता,सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार (National Film Award for Best Actor) और मनोनीत फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार,
क्रोध (Krodh)
विशेष उपस्थिति
आज का अर्जुन (Aaj Ka Arjun) भीमा
१९९१ हम (Hum) टाइगर / शेखर विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
अजूबा (Ajooba) अजूबा / अली
इन्द्रजीत (Indrajeet) इन्द्रजीत
अकेला (Akayla) इंस्पेक्टर विजय वर्मा
१९९२ खुदागवाह (Khuda Gawah) बादशाह खान मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
१९९४ इन्सानियत (Insaniyat) इंस्पेक्टर अमर
१९९६ तेरे मेरे सपने (Tere Mere Sapne) वर्णन करने वाला
१९९७ मृत्युदाता (Mrityudata) डॉ. राम प्रसाद घायल
१९९८ मेजर साब (Major Saab) मेजर जसबीर सिंह राणा
बड़े मियाँ छोटे मियाँ (Bade Miyan Chhote Miyan) इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह और बड़े मियाँ दोहरी भूमिका
१९९९ लाल बादशाह (Lal Baadshah) लाल " बादशाह " सिंह और रणबीर सिंह दोहरी भूमिका
सूर्यवंशम (Sooryavansham) भानु प्रताप सिंह ठाकुर और हीरा सिंह दोहरी भूमिका
हिंदुस्तान की कसम (Hindustan Ki Kasam) कबीरा
कोहराम (Kohram) कर्नलबलबीर सिंह सोढी ( देवराज हथौड़ा)
और दादा भाई

हैलो ब्रदर (Hello Brother) व्हाइस ऑफ गोड
२००० मोहब्बतें नारायण शंकर विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
२००१ एक रिश्ता (Ek Rishtaa) विजय कपूर
लगान वर्णन करने वाला
अक्स (Aks) मनु वर्मा विजेता, फ़िल्म समीक्षक पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (Filmfare Critics Award for Best Performance) और मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
कभी ख़ुशी कभी ग़म यशवर्धन यश रायचंद मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
२००२ आंखें (Aankhen) विजय सिंह राजपूत मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
हम किसी से कम नहीं (Hum Kisise Kum Nahi) डॉ. रस्तोगी
अग्नि वर्षा (Agni Varsha) इंद्र ( परमेश्वर ) विशेष उपस्थिति
कांटे (Kaante) यशवर्धन रामपाल / " मेजर " मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
२००३ खुशी (Khushi) वर्णन करने वाला
अरमान (Armaan) डॉ. सिद्धार्थ सिन्हा
मुंबई से आया मेरा दोस्त (Mumbai Se Aaya Mera Dost) वर्णन करने वाला
बूम बड़े मिया
बागबान (Baghban) राज मल्होत्रा मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
फ़नटूश (Fun2shh) वर्णन करने वाला
२००४ खाकी (Khakee) डीसीपीअनंत कुमार श्रीवास्तव मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
एतबार (Aetbaar) डॉ.रनवीर मल्होत्रा
रूद्राक्ष (Rudraksh) वर्णन करने वाला
इंसाफ (Insaaf) वर्णन करने वाला
देव डीसीपीदेव प्रताप सिंह
लक्ष्य (Lakshya) कर्नलसुनील दामले
दीवार (Deewaar) मेजर रणवीर कौल
क्यूं...!हो गया ना (Kyun...! Ho Gaya Na) राज चौहान
हम कौन है (Hum Kaun Hai) जॉन मेजर विलियम्स और
फ्रैंक जेम्स विलियम्स
दोहरी भूमिका
वीर - जारा (Veer-Zaara) सुमेर सिंह चौधरी मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार.
विशेष उपस्थिति
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो (Ab Tumhare Hawale Watan Saathiyo) मेजर जनरल अमरजीत सिंह
२००५ ब्लेक (Black) देवराज सहाय दोहरे विजेता, फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार & फ़िल्म समीक्षक पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (Filmfare Critics Award for Best Performance).
विजेता, राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (National Film Award for Best Actor)
वक़्त (Waqt) ईश्‍वरचंद्र शरावत
बंटी और बबली (Bunty Aur Babli) डीसीपीदशरथ सिंह मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
परिणीता (Parineeta) वर्णन करने वाला
पहेली (Paheli) गड़रिया विशेष उपस्थिति
सरकार (Sarkar) सुभाष नागरे / " सरकार " मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार
विरूद्ध (Viruddh) विद्याधर पटवर्धन
रामजी लंदनवाले (Ramji Londonwaley) खुद विशेष उपस्थिति
दिल जो भी कहे (Dil Jo Bhi Kahey...) शेखर सिन्हा
एक अजनबी सूर्यवीर सिंह
अमृतधारा खुद विशेष उपस्थिति कन्नड़ फिल्म
२००६ परिवार (Family) वीरेन साही
डरना जरूरी है (Darna Zaroori Hai) प्रोफेसर
कभी अलविदा न कहना (Kabhi Alvida Naa Kehna) समरजित सिंह तलवार ( आका.सेक्सी सैम ) मनोनीत , फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार
बाबुल (Baabul) बलराज कपूर
२००७ Eklavya: The Royal Guard एकलव्य
निशब्द (Nishabd) विजय
चीनी कम बुद्धदेव गुप्ता
शूटआउट एट लोखंडवाला (Shootout at Lokhandwala) डिंगरा विशेष उपस्थिति
झूम बराबर झूम (Jhoom Barabar Jhoom) सूत्रधार विशेष उपस्थिति
राम गोपाल वर्मा की आग (Ram Gopal Varma Ki Aag) बब्बन सिंह
ओम शांति ओम (Om Shanti Om) खुद विशेष उपस्थिति
द लास्ट लियऱ (The Last Lear) हरीश मिश्रा
२००८ यार मेरी जिंदगी (Yaar Meri Zindagi)
४ अप्रैल, २००८ को रिलीज
भूतनाथ (Bhoothnath) भूतनाथ ( कैलाश नाथ )
सरकार राज (Sarkar Raj) सुभाष नाग्रे / " सरकार " रिलीज हो गई
गोड तुस्सी ग्रेट हो (God Tussi Great Ho) सर्वशक्तिमान ईश्वर १५ अगस्त, २००८ को रिलीज हो रही है।
जमानत (Zamaanat) शिव शंकर उत्पादन के बाद

अलादीन (Aladin) जिन (Jin) फिल्मांकन समाप्त
तालिसमान (Talismaan)
फिल्मांकन
अपवर्जन (Exclusion)
फिल्मांकन
२००९ शांताराम[५४] खादर भाई

Sunday, February 27, 2011

स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद

विकिपीडिया, एक मुक्त ज्ञानकोष से
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स्वामी विवेकानंद
Swami Vivekananda-1893-09-signed.jpg

स्वामी विवेकानन्द शिकागो में, 1893
चित्र में विवेकानन्द ने बांग्ला में व अंग्रेज़ी में लिखा है: “एक असीमित, पवित्र एवं शुद्ध -सोच एवं गुणों से परे, उस परमात्मा को मैं नतमस्तक हूं” - स्वामी विवेकानन्द
जन्म तिथि 12 जनवरी 1863
जन्म स्थान कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत
जन्म नरेंद्रनाथ दत्त
मृत्यु तिथि 4 जुलाई 1902 (39वर्ष )
मृत्यु स्थान बैलूर मठ निकट कोलकाता
गुरु/शिक्षक रामकृष्ण परमहंस
कथन Arise, awake; and stop not till the goal is reached.[१]
इस संदूक को: देखें  संवाद  सम्पादन
स्वामी विवेकानन्द (१२ जनवरी १८६३- ४ जुलाई १९०२) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो नगर में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासम्मेलन में सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का वेदान्त अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानंद की वक्तृता के कारण ही पँहुचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। रामकृष्ण जी बचपन से ही एक पहुँचे हुए सिद्ध पुरुष थे। स्वामीजी ने कहा था की जो व्यक्ति पवित्र रुप से जीवन निर्वाह करता है उसके लिए अच्छी एकग्रता हासिल करना सम्भव है!

अनुक्रम

[संपादित करें] जीवन वृत्त

विवेकानंदजी का जन्म १२ जनवरी सन्‌ १८६३ को हुआ। उनका घर का नाम नरेंद्र दत्त था। उनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेंद्र को भी अंगरेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढंग पर ही चलाना चाहते थे। नरेंद्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु वे पहले ब्रह्म समाज में गए किंतु वहाँ उनके चित्त को संतोष नहीं हुआ।
सन्‌ १८८४ में श्री विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई। घर का भार नरेंद्र पर पड़ा। घर की दशा बहुत खराब थी। कुशल यही थी कि नरेंद्र का विवाह नहीं हुआ था। अत्यंत गरीबी में भी नरेंद्र बड़े अतिथि-सेवी थे। स्वयं भूखे रहकर अतिथि को भोजन कराते, स्वयं बाहर वर्षा में रातभर भीगते-ठिठुरते पड़े रहते और अतिथि को अपने बिस्तर पर सुला देते।

[संपादित करें] गुरु भेंट

रामकृष्ण परमहंस की प्रशंसा सुनकर नरेंद्र उनके पास पहले तो तर्क करने के विचार से ही गए थे किंतु परमहंसजी ने देखते ही पहचान लिया कि ये तो वही शिष्य है जिसका उन्हें कई दिनों से इंतजार है। परमहंसजी की कृपा से इनको आत्म-साक्षात्कार हुआ फलस्वरूप नरेंद्र परमहंसजी के शिष्यों में प्रमुख हो गए। संन्यास लेने के बाद इनका नाम विवेकानंद हुआ।
स्वामी विवेकानन्द अपना जीवन अपने गुरुदेव स्वामी रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर चुके थे। गुरुदेव के शरीर-त्याग के दिनों में अपने घर और कुटुम्ब की नाजुक हालत की परवाह किए बिना, स्वयं के भोजन की परवाह किए बिना गुरु सेवा में सतत हाजिर रहे। गुरुदेव का शरीर अत्यंत रुग्ण हो गया था। कैंसर के कारण गले में से थूंक, रक्त, कफ आदि निकलता था। इन सबकी सफाई वे खूब ध्यान से करते थे। वे सदा उनका आदर सत्कार करते थे। वे हमेशा उनसे ग्यान पाने कि लाल्सा रख्ते थे।

[संपादित करें] निष्ठा

एक बार किसी ने गुरुदेव की सेवा में घृणा और लापरवाही दिखाई तथा घृणा से नाक भौंहें सिकोड़ीं। यह देखकर विवेकानन्द को गुस्सा आ गया। उस गुरुभाई को पाठ पढ़ाते हुए और गुरुदेव की प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम दर्शाते हुए उनके बिस्तर के पास रक्त, कफ आदि से भरी थूकदानी उठाकर फेकते थे। गुरु के प्रति ऐसी अनन्य भक्ति और निष्ठा के प्रताप से ही वे अपने गुरु के शरीर और उनके दिव्यतम आदर्शों की उत्तम सेवा कर सके। गुरुदेव को वे समझ सके, स्वयं के अस्तित्व को गुरुदेव के स्वरूप में विलीन कर सके। समग्र विश्व में भारत के अमूल्य आध्यात्मिक खजाने की महक फैला सके। उनके इस महान व्यक्तित्व की नींव में थी ऐसी गुरुभक्ति, गुरुसेवा और गुरु के प्रति अनन्य निष्ठा।

[संपादित करें] यात्राएं

25 वर्ष की अवस्था में नरेंद्र दत्त ने गेरुआ वस्त्र पहन लिए। तत्पश्चात उन्होंने पैदल ही पूरे भारतवर्ष की यात्रा की।सन्‌ 1893 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व धर्म परिषद् हो रही थी। स्वामी विवेकानंदजी उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप से पहुँचे। योरप-अमेरिका के लोग उस समय पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे। वहाँ लोगों ने बहुत प्रयत्न किया कि स्वामी विवेकानंद को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले। एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला किंतु उनके विचार सुनकर सभी विद्वान चकित हो गए। फिर तो अमेरिका में उनका बहुत स्वागत हुआ। वहाँ इनके भक्तों का एक बड़ा समुदाय हो गया। तीन वर्ष तक वे अमेरिका रहे और वहाँ के लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान करते रहे। उनकी वक्ततृत्व शैली तथा ज्ञान को देखते हुये वहाँ के मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिन्दू का नाम दिया। [२] अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जाएगा' यह स्वामी विवेकानंदजी का दृढ़ विश्वास था। अमेरिका में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की अनेक शाखाएँ स्थापित कीं। अनेक अमेरिकन विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। 4 जुलाई सन्‌ 1902 को उन्होंने देह त्याग किया। वे सदा अपने को गरीबों का सेवक कहते थे।  .

[संपादित करें]"Source"-wikipedia

PYAR KA IJHAAR

pani ki BECHAINI ka, EHSAS GHADE ko hai
DHARTI ke sukhe ka pta BAADAL ko hai
Fir bhi na jane kyo aisa hota hai
BAADAL jo Barsne se INKAR krta hai
CHAHAT bhi meri hai , kuchh aisi hi SANAM tumse
Mai tumse pyaar krta hu ,isbaat se AVGATnahi ho tum 
Pr kya aisa hai ki, Meri MOHHABAT ko SWIKAR karoge tum 
Mai tumse puchh nahi sakta,Ye meri VIVISTA hai
Ki Meri saso ke DORO ,se PYAAR karoge tum

KAVITA MERI AISI HAI......................

KAVATA meri aisi hai ki ,tum iski MAMTA ho;
Is KAVITA ka KAVI tum ho ,tum iski KAVITA bhi ho
Jaise KAVI dub ke apni ,KAVITA ko likhta rahta
Is KAVITA KA tum PUJA ho, jiski hamne PUJA ki thi
KAVITA ki ek LEKHANI hoti 
Is KAVITA me sab tum hi ho
Tum hi mera BHOOT bhi ho,aur aisa VARTAMAN bhi ho
Tum hi mera BHAVISHYA bhi ho,Tum hi to ek RAG bhi ho
Isse pahle koi KAVITA ,aisa to likha na hoga
Jiska RACHNA itni sundar ,U ski sundarta kya hogi
VARN tumhara CHANDAN sa hai , KESH tumhare  VRIKCHH  (tree) ki chhav
NETRA tumhare NADIYO jaise , jo KESH bhiga ke aati ho
Saath me apni THANDI HAVA ka jhoka lati hai
DIL krta hai ki lele han is THANDI  ka EHSAS jara
Fir lagta hai dar ye aisa BARF ke komal aahat ka
NAACHE to MAYUR ki jisi ,Tere NRITYA ka mai divana hu
VAADI (AAWAJ) teri aisi hai ,jo samne baithi MAATA hai
 

EHSAS

Ek pyari si Ladaki ke bin JIVAN suna lagta hai ;
In birani si rato me, jivan to KHILONA lagta hai
Shit ki maddham chavo me CHADAR to apna  lagta hai
In thandi hava ke jhoko me, Us pyari LADAKI ke bin JIVAN suna lagta hai

Fir sagar ki gahrai me kuchh DUDHLA-DHUDHLA dikhata hai
Shwet Salona rang hai uska ,BAAL sukhaya karti hai vo
JHIL si gahri ANKHE uski, KAJAL bhi kuchh dikhati hai
ONTH to uski LALI si hai , ki LAL rang FIKI pd jaye
Us pyari LADAKI ke bin JIVAN suna lagta hai

Us ke BAAL to aise jhume, ki thandi hava ka jhoka ho
Ji krta hai in JHOKO  me mai bhi PANCHHI bn UD jau
SAJI SAVRI  kuchh aisi baithi ,DULHAN si vo lagti hai
Kitabo ki PARIYA  bhi to  , Uske aage kuchh km lagati hai
Us pyari LADAKI ke bin JIVAN suna lagta hai

Mera mn kahata hai ki, SAB KUCHH chhod ab uska bn jau
Vo mil jaye to RAJA ,nahi to SANYASI bn jau
Uske kadamo ki aahat hai aisi ,ki GHADIYA tik-tik karti hai
Uske aane se lagta ho aisa , koi JHAJHKOR raha ho kaisa
Us pyari LADAKI ke bin JIVAN suna lagta hai

DHUP ki bhini-bhini KHUSUBU ka EHSAS hua ho mujhako
Fir ANKHE khuli to dekha ki ho gaya hai SAVERA
Fir HAATH me pani liye MA JHAJHKOR rahi hai mujhko
Kahti hai ab uth ja LALLA  ho gaya bahut SAVERA
Fir socha sapne bhi kya khub hote hai ,EHASAS hua tab mujhako
Us pyari LADAKI ke bin JIVAN suna lagta hai